मुझे सिर्फ इसका अफसोस है कि मेरी साइड की स्टोरी बताने का मौका मुझे नहीं दिया गया- जीशान खान

अब जीशान का कहना है कि बिगबॉस हाउस से बाहर आने के बाद उन्हें सिर्फ इस बात का अफसोस है कि वीकेंड के वार पे उनकी साइड की स्टोरी सुनाने का मौका उन्हें नहीं दिया गया।
 
मुझे सिर्फ इसका अफसोस है कि मेरी साइड की स्टोरी बताने का मौका मुझे नहीं दिया गया- जीशान खान

बिगबॉस ओटीटी लगातार दर्शकों को एंटरटेन कर रहा है। एक से एक इंट्रेस्टिंग टास्क और कंटेस्टेंट्स के बीच लड़ाई-झगड़े की वजह से बिगबॉस ओटीटी की टीआरपी काफी अच्छी चल रहीं हैं। शो में अभी हाल ही में जीशान खान की प्रतीक सहजपाल और निशांत भट्ट के साथ हाथापाई हुई, जिसके बाद बिग बॉस ने जीशान को घर से बाहर निकाल दिया। अब जीशान का कहना है कि बिगबॉस हाउस से बाहर आने के बाद उन्हें सिर्फ इस बात का अफसोस है कि वीकेंड के वार पे उनकी साइड की स्टोरी सुनाने का मौका उन्हें नहीं दिया गया। जीशान ने न्यूज़ हेल्पलाइन की टीम से बात करते हुए इस बात का खुलासा किया। करण जौहर द्वारा बिगबॉस हाउस से बाहर निकाले जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जीशान ने कहा, "मुझे सिर्फ इस बात का अफसोस है की वीकेंड के वार पर अगर मेरी साइड की स्टोरी बताने का मौका मुझे दिया जाता तो शायद मैं घर से बाहर नहीं होता। करण जौहर के लिए मेरे दिल में बहुत रिस्पेक्ट है। बतौर होस्ट वो अपना काम कर रहे थे और कंटेस्टेंट्स के रूप में मैं अपना काम कर रहा था। ये शो आपका पेशेन्स टेस्ट करता है। बाकी जनता तो सब देख ही रहीं हैं।"

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बिगबॉस हाउस से बाहर निकालने का डिसीजन फेयर था या अनफेयर इस बारे में बात करते हुए जीशान ने कहा, "मेरे फेयर या अनफेयर बोलने से क्या फर्क पड़ता है। यहाँ जब लाइफ ही अनफेयर है, तो यह तो एक रियालिटी शो है। ऑडियंस शो को देख रहीं हैं इसलिए वही बता पायेगी कि डिसीजन फेयर था या अनफेयर। मैं ये डिसीजन ऑडियंस पर ही छोड़ देता हूं।"बातचीत के दौरान जब जीशान से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि प्रतीक को शो से बाहर निकालना चाहिए था तो उन्होंने कहा, "प्रतीक को निकालना चाहिए था या नहीं निकालना चाहिए था, ये बताने वाला मैं कौन होता हूं। मैं तो बस एक कंटेस्टेंट्स के रूप में घर में गया था और मेरे पास कोई पावर नहीं थी। प्रतीक को निकालना है या नहीं इसका जवाब भी ऑडियंस देगी, क्योंकि ऑडियंस 24 घंटे इस शो को देख रहीं हैं। जनता की ओपीनियन से बढ़कर और कुछ नहीं है, क्योंकि जनता की आवाज सबसे स्ट्रांग होती है।"

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