बंगाली फिल्ममेकर बुद्धदेव दासगुप्ता का निधन।

बुद्धदेव दासगुप्ता ने आज सुबह 6 बजे के आसपास अपनी आखिरी सांस ली। बुद्धदेव किडनी से जुड़ी बिमारी के कारण परेशान थे। कोलकाता के घर में उन्होंने आज सुबह आखिरी सांसे ली। परिवार के सदस्यों का कहना है कि, बुद्धदेव पिछले एक साल से बिमार थे 
 
बंगाली फिल्ममेकर बुद्धदेव दासगुप्ता का निधन।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भारतीय भाषाओं की अलग-अलग फिल्मों नेअपनी अलग पहचान बनाई है। जिसमे से बंगाली फिल्मों का सिलसिला भी बहुत खास रहा है। बंगाली फिल्मों के दिग्गज फिल्ममेकर्स अपनी पहचान बखूबी बनाते दिखे है। इस साल भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकारों को हमने खो दिया।‌इसी बीच अब खबर यह हैं कि फिल्ममेकर बुद्धदेव दासगुप्ता का निधन हो गया है, बुद्धदेव बंगाली फिल्मों के लिए बेहतरीन तरीके से जाने गए हैं।बुद्धदेव दासगुप्ता ने आज सुबह 6 बजे के आसपास अपनी आखिरी सांस ली। बुद्धदेव किडनी से जुड़ी बिमारी के कारण परेशान थे। कोलकाता के घर में उन्होंने आज सुबह आखिरी सांसे ली। परिवार के सदस्यों का कहना है कि, बुद्धदेव पिछले एक साल से बिमार थे उन्हें चलने में परेशानी होती थी। डाॅयलासिस का इलाज बड़े दिनों से किया जा रहा था । आज भी उनके डाॅयलासिस की अपोइंटमेंट थी। पर आज सुबह उनकी पत्नी जब  उन्हें जगाने गई तो बुद्धदेव इस दुनिया को छोड़ चुके थे।

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इस खबर ने फिल्म इंडस्ट्री में शोक का माहौल बना दिया। बुद्धदेव अपनी कलाकारी और स्टोरी टेलिंग के अंदाज को हमारे बीच छोड़ कर चले गए। इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी। डायरेक्टर गौतम घोष, अनीक दत्त और एक्टर प्रसोनजीत चैटर्जी ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए खास पलों को याद करते दिखे।बुद्धदेव दासगुप्ता की आखिरी डायरेक्ट की हुई फिल्म 'उरोजाहज' रही। उत्तारा,  तहादार कोठा, चराचर, लाल दर्जा,  स्वपनेर दिन, मंडो मयेर उपाख्यान और अनवर का अजब किस्सा जैसी बेहतरीन फिल्मों को उन्होंने बनाया। डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत करते हुए बुद्धदेव ने फिचर लेंथ फिल्मों का सफर शुरू किया। उनकी फिल्में समाज में आज के दौर और आम इंसानों की कहानियों की झलक दिखाती थीं। बुद्धदेव जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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